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gunjan
Tuesday, January 12, 2010
प्रभू मोरे अवगुण चित न धरो /सूरदास
प्रभू मोरे अवगुण चित न धरो ।
समदरसी है नाम तिहारो चाहे तो पार करो ॥
एक जीव एक ब्रह्म कहावे सूर श्याम झगरो ।
अब की बेर मोंहे पार उतारो नहिं पन जात टरो ॥
1 comment:
Sanjeev Kumar Sanatani
April 23, 2012 at 7:34 AM
प्रभू मोरे अवगुण
चित न धरो ।
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प्रभू मोरे अवगुण
ReplyDeleteचित न धरो ।