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gunjan
Sunday, January 3, 2010
मधुशाला / हरिवंशराय बच्चन
मैं कायस्थ कुलोदभव मेरे पुरखों ने इतना ढ़ाला,
मेरे तन के लोहू में है पचहत्तर प्रतिशत हाला,
पुश्तैनी अधिकार मुझे है मदिरालय के आँगन पर,
मेरे दादों परदादों के हाथ बिकी थी मधुशाला।
1 comment:
Anonymous
January 8, 2010 at 6:37 AM
great poetry
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